मेष लग्न में मंगल का बारह (12) भावो में फल योग.

प्रथम भाव में मंगल का होना मेष लग्न की कुंडली बनाता है। मंगल की दृष्टि स्वगृही से 4 ,7 और 8 होता है। मेष लग्न के प्रत्येक भावों में मंगल कैसा परिणाम देंगे यह आपको क्रमशः पता चलेगा।

प्रथम भाव में मंगल लग्नेश होने के कारण बहुत अच्छा प्रभाव देते है। यहाँ पर मंगल रुचक नामक पंच महापुरुष योग का निर्माण करेंगे। ऐसे जातक बहुत अधिक आवेशी ,बुद्धिमान ,बलशाली , निरोगी एवं उत्तम स्वास्थ्य के होते हैं । ऐसे जातक अपने श्रम ,पराक्रम , सामर्थ्य से जीवन में सफलता प्राप्त करता है। प्रथम भाव में मंगल जातक को मांगलिक बनाता है।

दूसरे भाव में मंगल अपने शत्रु राशि (शुक्र) में हैं लेकिन यहाँ वो कारक होकर उच्च का परिणाम देंगे। दूसरा भाव धन व कुटुम्ब का भाव है अतः मंगल देव कभी धन व कुटुम्ब जनों की सुख में कमी नहीं होने देंगे। दूसरा भाव वाणी का भी करक है तो जातक के वचन में प्रभाव होगा और कटु भाषी भी होगा। दूसरे भाव में मंगल देव की दृष्टि 5वें , 8वें और 9वें भाव (भाग्य भाव) पे होगी ,अतः मंगल की दशा ,अन्तर्दशा में भाग्य में वृद्धि होगी। 5वें भाव पर दृष्टि होने से उत्तम विद्या का लाभ व जातक का पुत्र पराक्रमी होगा। यदि मंगल पर पाप ग्रह की दृष्टि न हो तो अष्टम भाव पे मंगल की दृष्टि जातक को दीर्घायु बनायेगा ।

तीसरे भाव में मंगल देव मेहनत ,ऊर्जा व छोटे भाई-बहन के कारक होते हैं। जातक बहुत पराक्रमी होगा। छोटे भाई-बहनो से अत्यधिक प्रेम करेगा। अतः छठे ,नवम और दशम भाव में दृष्टि होने से इन भावों के वह शुभ परिणाम देंगे। नवम भाव पे दृष्टि होने से जातक को भाग्य का साथ मिलेगा और मंगल की दशा ,अन्तर्दशा में भाग्योदय की प्राप्ति होगी। भाग्योदय से भूमि-भवन का सुख उत्तम प्राप्त होगा। दशम दृष्टि कर्म भाव पे होने से जातक परिश्रम से भाग्य की प्राप्ति करेगा। तथा छठे भाव पे दृष्टि होने से शत्रु पर विजय प्राप्त करेगा। नोट – मंगल की प्रथम दृष्टि छठे भाव पे होने से जातक को कभी ऋण नहीं देना चाहिए ऐसा करने से आपका पैसा कभी वापस नहीं मिलेगा और ऋण ले सकते हैं लेकिन किसी जानकार की सलाह से।

चौथे भाव में (कर्क राशि) में मंगल नीच के हो जाते हैं। यहाँ मंगल अशुभ परिणाम देंगे ,अतः जातक को माता के सुख से वंचित कर देंगे और संपत्ति प्राप्ति में भी अर्चन उत्पन्न करेंगे। आपको छल-कपट का सामना करना पड़ेगा। पत्नी से, माता से विवाद होता रहेगा। प्रथम और अष्टम भाव के स्वामी मंगल हैं तो इन भाव के कारकत्व में कमी लाएंगे और यदि किसी शुभग्रह की दृष्टि या उस भाव में हो तो प्रथम अष्टम भाव में कोई परेशानी नाही आएगी। यहाँ बैठकर मंगल चौथे दृष्टि से सप्तम भाव को देखेंगे तो इस भाव की हानि होगी और व्यापर तथा पत्नी से संबंधों में परेशानी होगी। सप्तम और अष्टम दृष्टि दशम भाव जो कि कर्म भाव है और ग्यारहवाँ भाव बड़े भाई-बहनो का कारक है तो इन चीज़ो में भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।

पंचम भाव में मंगल उच्च का परिणाम देंगे क्योंकि पंचम भाव मित्र का भाव सूर्य का है। जातक को को सुन्दर संतान की प्राप्ति होगी ; जातक उच्च कोटि का शिक्षा ग्रहण करेगा। तेजस्वी होने के साथ-साथ संतान प्राप्ति के बाद ऐसे जातको का भाग्योदय होता है। चतुर्थ दृष्टि अष्टम भाव पे होने से जातक को निरोग व दीर्घायु बनाएंगे। सप्तम दृष्टि आय भाव में होने से मंगल की दशा ,अन्तर्दशा में जातक को आय के श्रोत में वृद्धि करेगा अथवा भूमि , भवन से आय के श्रोत प्राप्त करवाएगा।

छठे भाव में मंगल देव शुभ परिणाम नहीं देते हैं। लग्नेश होने के बावजूद 6 भाव ही अशुभ है। छठा भाव दुर्घटना का कारक है , कोर्ट -कचहरी , ऋण ,सट्टा का भाव है अतः पैतृक संपत्ति को लेकर कोर्ट के चक्कर , आत्मविश्वाश में कमी और सप्तम दृष्टि व्यय भाव पे होने से भूमि भवन से जुड़े मामलो में फ़िजूल खर्च करवाएगा।

सप्तम भाव मंगल के शत्रु ग्रह (शुक्र) का है ,फिर भी मंगल मेष लग्न के लिए सातवें भाव में अच्छा परिणाम देंगे। पत्नी बहुत सुन्दर होगी ,विवाह पश्चात भाग्योदय होगा। लग्नेश मंगल जातक को तेजश्वी बनाएगा। शत्रुओं पर जीवनपर्यन्त विजय प्राप्त होगी।

अष्टम भाव में मंगल स्वराशि में होकर भी शुभ परिणाम नहीं देंगे। यह जातक को रक्त विकार से ग्रसित कर सकता है। धन की छति ,आत्मविश्वाश में कमी और जीवन के प्रत्येक छण पर बाधा मिलता रहेगा। note – लग्न के स्वामी स्वयं की छति नहीं होने देंगे लेकिन बाधा मुक्ति के लिए मंगल देव का जाप और नित्य हनुमान चालीसा और बजरंग बाण का पाठ राहत देगा।

नवम भाव में लग्नेश मंगल मित्र राशि में अच्छा परिणाम देंगे , जातक भाग्यवान होता है। पिता के भाव में मंगल के होने से ,जातक पिता से बहुत प्रेम करने वाला होता है व पैतृक संपत्ति की प्राप्ति होगी। बड़ो का आदर करेंगे और धर्म कर्म में आपकी आस्था होगी। 28 वर्ष के उम्र में आपकी भाग्योदय होगी। भाग्योदय से नौकरी जीविका के छेत्र में उन्नति प्राप्त होगा।

दशम भाव में मंगल (मकर) राशि में उच्च का हो जाते हैं। यहाँ बैठे मंगल रुचक नामक पंचमहापुरुष योग का निर्माण करेगा। कर्म भाव में मंगल बाकि भावों से सबसे उच्च का फल देते हैं। ऐसे जातक बेहद व्यापारी , सरकारी नौकरी व प्रशासनिक कार्यों में उच्च पद प्राप्त करते हैं। जातक अपने बल ,बुद्धि से समस्त प्रकार के सुख की प्राप्ति करता है।

ग्यारहवे भाव में मंगल (शनि) के भाव में बावजूद परिणाम प्राप्त होते हैं। जातक बड़े भाई बहनों या बड़े जनों से लाभ प्राप्त करता है। मंगल की दशा में जातक को सभी प्रकार से लाभ मिलेगा और दूसरे भाव पे दृष्टि धन में वृद्धि करेगा , तथा पंचम व छठे भाव पे दृष्टि भी संतान सुख व शत्रु पर विजय प्राप्त करवाएगा।

बारहवें भाव में मंगल अपने मित्र राशि , गुरु के राशि (मीन) में होते हैं। परन्तु यह भाव अच्छा नहीं माना जाता है। यह भाव जेल , व्यय का और मेडिकल खर्च को दर्शाता है। जातक को मानसिक परेशानी और आमदनी कम खर्चा ज्यादा करवाएगा। जहां दृष्टि होगी यानि की 3 , 6 और 7 भाव को भी आंशिक रूप से कमज़ोर करेगा।

मंगल की शांति के लिए नित्य हनुमान चालीसा का पाठ करें और यथा संभव मंगल की चीज़ों का दान ,दक्षिणा तथा सुन्दर कांड , बजरंग बाण इत्यादि का पाठ करें। मंगल की शांति जप के द्वारा भी की जा सकती है। बिना संकल्प के कोई भी जप अधूरा माना जाता है अतः संकल्प लेकर कार्य संपन्न करें। जय श्री कृष्ण।

मेष लग्न में बुध का बारह (12) भावो में फल योग.

मेष लग्न में बुध मारक ग्रह होते हैं। बुध के दो भाव हैं। मिथुन राशि (3) भाव तथा कन्या राशि (6) भाव। 3 भाव पराक्रम का और 6 भाव रोग ,ऋण का करक है। अतः दोनों भाव अच्छे नहीं है। बुध की दृष्टि स्वस्थान से केवल 7 की होती है।

प्रथम भाव में मेष लग्न में बुध दिग्बली हो जाते हैं तो जातक बुद्धिमान होगा ,व्यापर में अच्छा बोलने की कला होगी। बुध शत्रु गृही है तो नकारात्मक रूप से भ्रमित मति का बना देंगे और निर्णय लेने की क्षमता में कमी होगी।

दूसरे भाव में बुध अपने मित्र राशि में अच्छे फल देंगे। जातक को धन लाभ , परिवार से लगाव व परिवार से मुनाफा होगा ,और अच्छे वाणी के होंगे।

तीसरे भाव में बुध अच्छा फल नहीं देंगे। जातक को पराक्रम देंगे लेकिन परिश्रम के अनुसार फल नहीं मिलेगा। बुध की सप्तम दृष्टि नवम भाव में ,पैतृक संपत्ति की प्राप्ति ,पिता से प्रेम व धार्मिक प्रविर्ती का होगा।

चौथे भाव में बुध अच्छा परिणाम नहीं देंगे क्योंकि चौथा भाव चन्द्रमा का भाव है तो चन्द्रमा से शत्रुता के कारण मातृ प्रेम में कमी ,माता के स्वस्थ्य में हानि ,माता से विवाद तथा बुध की दशा , अंतर्दशा में मकान , वाहन एवं सुख करक तत्वों में कमी या कठिनाई का सामना करना होगा।

पंचम भाव में बुध , सिंह राशि में मिला जुला परिणाम देते हैं। जातक विद्वान व अध्ययन में अव्वल रहेगा। अपने बुद्धि से या पढाई से सफलता प्राप्त करने वाला होगा , लेकिन शिक्षा अर्जन करने में बाधा आएगी। छठे भाव का स्वामी पंचम भाव में जाके बैठा है तो संतान से समस्या देगा। पंचम भाव में बैठे बुध देव सप्तम दृष्टि से आय भाव को देखेंगे तो जातक विभिन्न प्रकार के श्रोतो से धन अर्जित करेगा यदि पंचम भाव में सूर्य भी आकर बैठ जाएँ तो बुधादित्य योग बनेगा जिससे अगर जातक की पढाई बाधित भी होती है तो वो अपने बुद्धि से व्यापर करके लाभ कमाएगा। बुध जब वक्री होंगे तब मेष राशि वालों को लाभ देंगे , रुके हुए धन की या चल अचल संपत्ति की प्राप्ति होगी।

छठे भाव में बुध स्वराशि होकर कुछ अच्छे व कुछ बुरे फल देंगे। छठे भाव में बुध शत्रुहन्ता योग बनाएँगे। इनकी राशि पराक्रम भाव में है और स्वयं छठे भाव में होने से कुछ परेशानियाँ देंगे। यहां बैठे बुध विपरीत राजयोग का निर्माण करेंगे। आप अपने परिश्रम से अवश्य ही सफलता प्राप्त करेंगे। यहाँ बैठे बुध अपनी एक मात्र दृष्टि जो कि नीच दृष्टि से व्यय भाव को देखेंगे तो हमेशा आपका धन फ़िज़ूल खर्ची में या अनावश्यक खर्चा होता रहेगा। अतः बहुत सोच समझ के ही अपना जेब खाली करें। बुध देव छोटे मोटे त्वचा जनित रोग दे देते हैं , इसके अलावा कोई गंभीर दिक्कत नहीं। बुध सौम्य ग्रह हैं अतः शत्रुहन्ता योग से शत्रु में वृद्धि तो करेंगे लेकिन आपके कोशिशों से विरोधी शांत भी रहेंगे।

सप्तम भाव में बुध बैठकर लग्न को देखेंगे तो जातक को कोमल ह्रदय वाला बनाएंगे। जहाँ आपको अत्यधिक क्रोध के लिए जाना जाता है , वहीँ बुध आपको सामंजस्य व्यक्तित्व वाला बनाएंगे। क्रोध तो मंगल की देन है लेकिन उतना ही सौम्य व्यक्तित्व भी होगा। जातक की पत्नी बुद्धिमान होगी और यहाँ बैठे बुध अत्यंत श्रेष्ठ परिणाम देंगे।

अष्टम भाव में बैठे बुध तीसरे और छठे भाव में बैठ कर पराक्रमेश तथा विपरीत राजयोग का निर्माण करेंगे। अष्टम भाव में मंगल की राशि में बैठे बुध अगर मंगल के साथ तात्कालिक मैत्री कर ले तो जातक का स्वास्थ्य कम ख़राब होगा। ऐसे जातक बाल्य काल में बहुत देर से बोलना सीखते हैं। बुध तात्कालिक मैत्री कर ले तो जातक को आत्मज्ञान की प्राप्ति होती है। यहाँ बुध अच्छे स्तिथि में हुए तो दूसरे भाव को बल प्रदान करेंगे जिससे संघर्ष करने के पश्चात धन की प्राप्ति होगी। और वाणी से जुड़े कार्यों में भी अच्छे परिणाम देंगे।

नवम भाव में बुध देव गुरु की राशि (धनु राशि) में बैठें हैं। पराक्रम और शत्रु भाव में इनकी राशि होने से तथा भाग्य भाव में बैठ कर पराक्रम में वृद्धि करेंगे। अतः जातक जीवन में अपने भाग्य की प्राप्ति अपने पराक्रम से करेगा। यदि कुंडली में बुध गुरु के साथ तात्कालिक मित्रता कर लें तो भाग्य में श्रेष्ठ लाभ देंगे।

दशम भाव में बुध पराक्रमेश तथा ऋणेश होकर बैठे हैं तो जातक अपने पराक्रम से कर्म से सफलता लाभ करेगा ऋणेश होने से ऋण लेकर भी व्यापर करने के योग बनते हैं अपने शत्रु से भी लाभ कमा लेते हैं ऐसे जातक। ऐसे लोग एक अच्छे ज्योतिष बन सकते हैं। देश – विदेश के भ्रमण कार्य के माध्यम से हो सकते हैं। दशम भाव में बैठे बुध मित्र राशि में करक होकर हमेशा उच्च परिणाम देंगे। बुध की सप्तम दृष्टि सुख भाव पे होने से जातक अपने द्वारा भूमि ,भवन ,वहां का सुख उत्तम प्राप्त करेगा।

एकादश भाव में बैठे बुध पराक्रमेश तथा ऋणेश बनकर बैठे है तो जातक ऋण से ही आगे बढ़ेगा। ऐसे जातको के लिए ऋण लेना श्रेष्ठ होगा। शत्रुता मत करिये बल्कि शत्रु पर शासन करिये। ऐसा जातक शत्रु से भी लाभ प्राप्त करने में महारथ हासिल किये होते है जन्म जात। एकादश भाव में बैठे बुध अति विशिष्ट कारक हो जाते हैं, अति विशिष्ट कारक होने से जातक जीवन भर धन की कमी महसूस नहीं करेगा। कुंडली में सूर्य , शुक्र दशम एकादश या द्वादश भाव में ही कहीं बैठे होंगे अतः जातक धनि होगा। यहाँ बैठे बुध अपने सप्तम दृष्टि से ज्ञान भाव को देखेंगे अतः जातक अपने बुद्धि से , विवेक से श्रेष्ठ लाभ प्राप्ति करेगा , जीवन में कभी लाभ की कमी नहीं होगी। ऐसा जातक केवल देश से ही नहीं बल्कि विदेश से भी धन अर्जन करता है।

द्वादश भाव में बैठे बुध नीच के हो जाते हैं अतः जातक को ऋण लेना और ऋण देना दोनों ही भारी पर सकता है , अतः ऋण लेने और देने से बचें। बारहवें भाव में बुध प्रबल विपरीत राजयोग बनाएँगे अतः जातक श्रेष्ठ सफलता प्राप्त करेगा लेकिन वाणी के कारक नीच राशिस्थ होकर बैठे हैं अतः जीवन के प्रारंभिक दौर में जातक को कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा , स्वस्थ्य में दिक्कत और यदि बुध की महादशा में जातक का जन्म हो तो जीवन का प्रारंभिक दौर बहुत ही मुश्किल होगा , जीवन यदि मुश्किलों से बच जाये तब जेक आप अपने जीवन में श्रेष्ठ कार्य कर पाएंगे। कई बार जीवन बचाना ही बहुत मुश्किल कार्य बन जाता है। बारहवे भाव में बैठे बुध नीचभंग राजयोग और विपरीत राजयोग बनाएंगे , और यदि बुध के साथ बृहस्पति भी बैठे हो तो धर्म कर्म के साथ जीवन को आगे बढ़ाए आपको निश्चय ही सफलता प्राप्त होगी। यहाँ बैठे बुध सप्तम दृष्टि से अपने ही भाव को देखेंगे अतः जातक शत्रुहन्ता होगा और ऋण लेना कुछ हद तक ठीक नहीं होगा अगर आपकी निर्णय शक्ति अच्छी हो, आत्मबल अच्छा हो तो ऋण ले कर सफलता के प्रयास कर सकते हैं।

बुध कुमार ग्रह हैं , बुध सबसे जल्दी फल देने वाले ग्रह हैं बुध की महादशा में बुध अच्छे या बुरे फल सबसे जल्दी दे देंगे , मेष लग्न के जातक बुध का रत्न धारण मत करिये। बुध बुद्धि , वाणी , व्यापर के करक हैं अतः बुध को फलित करने के लिए गणेश जी की पूजा कीजिये। ॐ गं गणपतये नमः का नित्य 3 या 5 माला जपिये। बुध लग्न में बलि , दशम भाव में कारक और एकादश भाव में अति विषिश्ट कारक हो जाते हैं।

मेष लग्न में शुक्र का बारह (12) भावो में फल योग.

शुक्र मेष लग्न में प्रथम भाव का होकर जातक को बहुत शौक़ीन किस्म का बनाता है , संगीत प्रेमी , मन-मौजी , हंस मुख और जीवन के समस्त प्रकार के सुखों की इच्छा होती है और जातक उसे अपने परिश्रम से प्राप्त करता है। शुक्र प्रथम भाव में जातक को पनपसन्द विवाह का भी योग प्रदान करते है। लग्न से सप्तम भाव पर दृष्टि वैवाहिक जीवन उत्तम बनाती है , जातक की पत्नी अति सुन्दर होगी। अगर यह लड़की की कुंडली में देखा जाए तो उसका पति अति सुन्दर होगा या शुक्र प्रधान का होगा। धन भाव के स्वामी लग्न गत हो जाए तो जातक महाधनी होगा शुक्र की दशा अन्तर्दशा में। शुक्र लग्न में बैठे हो तो शुक्र प्रसाधन वाले सामग्री से धन अर्जित करना बेहद उत्तम होगा , भोग -विलास की सामग्री , कपड़ों का व्यापर, मेहेंगी गाड़ी का व्यापार ,इत्यादि बहुत लाभप्रद होगी।

दूसरे भाव में शुक्र स्वराशि में होकर बहुत अच्छा परिणाम देंगे , जातक उच्च कोटि का धनि व जीवन पर्यन्त धन की कमी नहीं होगी , शर्त ये है की शुक्र का अंश बल ठीक होना चाहिए। जातक की वाणी में आकर्षण होगी व रिश्तेदारों से अच्छा सम्बन्ध होगा।धन भाव में बैठे शुक्र सप्तम के कारकत्व में भी वृद्धि करेंगे। यहाँ बैठे शुक्र के वजह से अचल संपत्ति ख़ूब होगी ,अगर चन्द्रमा कुंडली में ख़राब नहीं है तो जीवन में श्रेष्ठ धन संचय कराएगा। अगर ज़रा सा चन्द्रमा कमज़ोर सूर्य के साथ युति हो और बृहस्पति \ jupitar से दृष्ट ना हो तो जातक पथ भ्रष्ठ हो जाएगा , गलत कार्यो में लिप्त रहेगा। मंगल यहाँ आके बैठ जाएं तो कामुकता बेहद तीव्र होगी। दूसरे भाव में बैठे शुक्र अपनी एक मात्र दृष्टि से अष्टम भाव को देखेंगे अतः आराम पसंद लोगो को होने वाली बीमारी से ग्रसित क्र देंगे। बेशक ये दिक्कत देने वाला होगा लेकिन जातक धन के अभाव में नहीं रहेगा। 0 से 6 डिग्री तक मृत अवस्था में होंगे शुक्र और 24 से 30 डिग्री तक बाल अवस्था में होंगे शुक्र। मृत अवस्थ में शुक्र हो तो जातक को सुखों में कमी ला देगा वहीं अगर साथ में अगर सूर्य बैठा हो तो शुक्र अस्त हो जाएगा इस अवस्था में जातक को पैतृक संपत्ति प्राप्त तो होगी लेकिन वो गलत चीज़ों में धन बर्बाद कर देगा।

तीसरे भाव में बैठे शुक्र मित्र राशि में चतुर्थ भाव के सुखों में वृद्धि कर देंगे। जातक को पराकर्मी बना देंगे और नवम भाव में गुरु की राशि को देखेंगे अतः भाग्य में भी कमी नहीं आने देंगे। ऐसे जातक को स्त्री से लाभ , महिलाएँ उनके सहयोगिनी बनके हमेशा साथ देती नज़र आती है। पराक्रम भाव मे बैठे शुक्र जातक को पराक्रमी तो बनाएगा लेकिन ऐसा जातक अपनी ऊर्जा विपरीत लिंग के आकर्षण के लिए व्यय करेगा , अतः चरित्र में कमी निरंतर अति रहती है। वही साथ में अगर सूर्य बैठे हो तो जातक का आत्मबल ऐसा होगा की अगर आम आदमी किसी स्त्री से बात करने में झिझकता हो वहीँ ये निर्भय होकर अपनी बात कह डालेंगे।किसी से भी अपनी बात कह देना इनकी खासियत होगी।

चौथे भाव में शुक्र होने से यदि चन्द्रमा ,शुक्र से 3 घर आगे या 3 घर पीछे कही भी आपके कुंडली में बैठा हो तो यह तात्कालिक मैत्री में हो जाएगा। इस अवस्था में शुक्र सुखों को देने वाले होते हैं , यहाँ शुक्र दिग्बली हो जाते हैं। एक मात्र दृष्टि से दशम भाव को देखेंगे अतः व्यापर में भी श्रेष्ठ लाभ देखने को मिलेगा। माता से सुख , घर अगर छोटा भी हो तो साज – सज्जा युक्त घर होगा। जातक अगर वाहन भी रखेगा वह भी आकर्षक होगा , बदल बदल कर भिन्न भिन्न प्रकार के इत्र का नए कपड़ो का इस्तेमाल करना , बाजार से खोज के साज -सज्जा की सामग्री उपभोग करेगा। यहाँ अगर 0 से 6 डिग्री के शुक्र होंगे तो मृत अवस्था में हो जाएंगे तो शुक्र से सम्बंधित चीजों में कमी आ जाएगी। अगर सूर्य के साथ यहाँ युति हो जाती है और शुक्र मृत न हो तो भी दिक्कत की बात नहीं है, अगर आप पुरुष हैं तो वीर्य में कमी आ जाएगी , अन्यथा शुक्र इस भाव में शुभ परिणाम देंगे।

पंचम भाव में आकर बैठे शुक्र धनेश का पंचम भाव में बैठना केंद्र त्रिकोण राजयोग बनाएगा , और महाधनी योग बन जाएगा। पंचम भाव में बैठ कर लाभ भाव को देखेंगे अतः जीवन में लाभ के तरह तरह के साधन देंगे। जातक अपने ज्ञान और बुद्धि से खूब धन उपार्जित करने वाला होगा। सूर्य के साथ यहाँ युति हो तो संतान के सुखों में कमी आ जाएगी , प्रेम सम्बन्ध में ज़्यादा कामुकता आ जाएगा। अगर शुक्र यहाँ अकेले बैठे हों और किसी गर्म गृह से दृष्टा न हो तो केवल पुत्री की ही प्राप्ति होती है। पंचम भाव में होने से एक घर आगे का भी फल देंगे अतः जीवन में रोग, शत्रु ,ऋण की स्तिथि बनी रहेगी। मेष लग्न के जातक तीव्र होते है और पंचम भाव भवनों को भी दर्शाता है अतः कोई न कोई गलत निर्णय लेने से बचे। आपसे ईर्ष्या करने वाले लोग भी होंगे लेकिन अपने व्यक्तित्व को मजबूत बनाइये इससे आपको जीवन में सफलता हासिल करने में आसानी होगी।

छठे भाव में शुक्र धन भाव और दाम्पत्य भाव के मालिक नीच राशि में जाके बैठे है तो यह नीच भंग राजयोग बना रहा है ,यहाँ से बारहवे भाव को देखेंगे तो विदेश यात्रा ,हवाई यात्रा के अवसर बने रहेंगे , लग्न का फल भी देखने को मिलेगा अतः सुन्दर व्यक्तित्य का बनाएगा। लेकिन यह दांपत्य जीवन में मतभेद शुरू करवा देगा सूर्य से अस्त होने पे संतान सुखों में कमी आ जाएगी , और वक्री या मृत अवस्था में दांपत्य को ही प्रभावित करेंगे। सप्तम भाव में वृद्धि होगी जिससे जीवन साथी ख़ूबसूरत होगा लेकिन आपके चीड़ चिड़े स्वभाव के कारण दांपत्य में मतभेद बना रहेगा।

सप्तम भाव में शुक्र मालव्य योग निर्माण करेंगे ,लग्न पे दृष्टि तो जातक के व्यक्तित्व को अद्भुत बना देंगे। दांपत्य जीवन से लेकर हर भौतिक सुखों को प्रदान करने वाले होंगे , हर प्रकार के ऐशो आराम की सामग्री आपके पास होगी। सूर्य से दृष्ट या युति होने पे अगर अस्त हो जाते हैं तो थोड़ी समस्या उत्तपन होगी, दांपत्य जीवन में तनाव व मतभेद शुरू कर देगा। मृत अवस्था में होने पे जनन अंग में समस्या या शुक्र से छिन्न कर देंगे। ऐसे में गाय की सेवा , माँ दुर्गा की आराधना , और स्त्री जाती की सम्मान करने से आपको अच्छा नतीजा मिलेगा।

अष्टम भाव में शुक्र धन भाव पे दृष्टि होने से धन में वृद्धि और अष्ठम भाव में होने से ऐसे लोगो को ज्योतिष विज्ञान की खूब रूचि व समझ होगी तथा तंत्र मंत्र विद्याओं में भी विश्वास होगा। अष्टम भाव में अगर वक्री होते है तो परिणाम न्यून होगा लेकिन अच्छा होगा। मंगल अष्टम भाव से तीन घर आगे या पीछे कहीं बैठे हो तो भी परिणाम अच्छा देंगे।

नवम भाव में भाग्य भाव में शुक्र हों और यहाँ से तीन घर आगे या पीछे देव गुरु बृहस्पति बैठे हो तो शुक्र अच्छा फल ही देंगे। भाग्य प्रबल होगा आपके कार्य से ज़्यादा आपको फल देगा। 0 से 6 डिग्री में शुक्र बाल अवस्था में हो और गुरु तीन घर आगे पीछे हो तो शुक्र का रत्न पेहेन इसे और बल दीजिये जिससे परिणाम और बेहतर मिले। अगर गुरु तात्कालिक मैत्री में नहीं है तो धन सम्बन्धी मामलों में भी कमी आएगी और दांपत्य में भी कमी नज़र आएगी। और गुरु 3 घर आगे पीछे स्थित हैं तो विवाह पश्चात भाग्योदय और महाधनी योग का भी निर्माण होगा। वक्र अवस्था में भी बेहतर परिणाम देंगे और मृत होने पर भी परिणाम कम लेकिन बेहतर मिलेगा।

दशम भाव में शुक्र मित्र राशि यानि की शनि के राशि में स्थित हैं अतः आपको लाभ ही देंगे यहाँ बैठे शुक्र। धन भाव के स्वामी कर्म भाव में बैठे हैं अतः जातक गरीब घर में जन्म लेने के बाद भी शुन्य से सृजन कर धन को प्राप्त करता है , महाधनी होता है। चौथे भाव पे दृष्टि होने से हर प्रकार के सुख की प्राप्ति अपने मेहनत से और अपने माँ का और स्त्री जनों के सम्मान से शुक्र आपको और बेहतर परिणाम देंगे। वक्र या मृत अवस्था में हो शुक्र तो परिणाम में कमी आ जाएगी , बल में कमी हो तो भी परिणाम काम होगा , अतः किसी ज्योतिष की सलाह से उपाय करें।

ग्यारहवे भाव में शुक्र ,धन भाव के और दांपत्य भाव के स्वामी लाभ भाव में हो अतः यह महाधनी योग हुआ और जातक या जातिका विवाह के पश्चात ही लाभ के अनेक साधन को प्राप्त करेंगे। जीवन पर्यन्त लाभ की स्तिथि बनी रहेगी , स्त्री वर्ग से जातक हमेशा लाभ प्राप्त करेगा। अगर आप व्यापार में किसी को partner बनाना चाहते हैं तो अपने पत्नी को बनाइये बेहतर परिणाम प्राप्त होंगे। पंचम भाव पे शुक्र की दृष्टि आपको विद्वान् बुद्धिमान बनाएंगे तथा आपके संतान भी ज्ञानवान बुद्धिमान होंगे। फिल्म उद्योग , कला छेत्र , महँगे वस्त्र , वाहन अदि दे सम्बंधित कार्य आपके लिए बहुत फायदे मंद होगा। वक्री , मृत और न्यून होने पे परिणाम में कमी आ जाएगी।

बारहवें भाव में शुक्र अपने उच्च राशि में होंगे और धन व दांपत्य के स्वामी का 12 भाव में जाना यह आपको बेहद कमोबेश बनाता है , अपने चरित्र को बेहद मजबूत बनाइये तभी ज़िन्दगी में तरक्की नशीब होगी। अपने पत्नी के अलावा किसी और से सम्बन्ध स्तापित करता है है तो यह बेहद बुरा होगा , शुक्र पापग्रह से दृष्ट भी हो और जातक अपने आप को संयमित रखता है तो विदेश भ्रमण , भोग विलास की ज़िनदी , पत्नी से बेहद प्रेम व धन की विदेश से आवागमन बानी रहेगी।

माँ जगत जननी जगदम्बा की आराधना , गौ सेवा , स्वेत वस्तु का उपयोग , व स्त्री जाती का सम्मान ये आपके कुंडली में कैसी भी शुक्र की स्थिति को मजबूत बनाए रखता है।

मेष लग्न में चन्द्रमा का बारह भावों में फल योग।

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