मेष लग्न में चन्द्रमा का बारह भावों में फल योग।

मेष लग्न में बारहो भावों में चन्द्रमा क्या फल देंगे यह आपको क्रमशः पता चलेगा , निचे लिखे बिंदुओं से।

चन्द्रमा का आपके कुंडली में बलि होना बहुत आवश्यक है , आपके जीवन में साढ़ेसाती से लेकर ढैया या फिर जीवन में आ रही कठिनाइयों के लिए चन्द्रमा का उपचार बहुत आवश्यक है। एक राशि की दुरी तय करने के लिए चन्द्रमा को सवा दो दिन का समय लगता है , और धरती से सबसे नज़दीक होने के कारण चन्द्रमा का प्रभाव सबसे ज़्यादा हमारे जीवन में है। चन्द्रमा; मन , जल , माता के कारक है। मेष लग्न के कुंडली में चन्द्रमा जिस भाव में बैठे होंगे वह आपकी राशि कह लाएगी।

चन्द्रमा यदि प्रथम भाव में ही आपके कुंडली में स्थित हैं तो आप मेष लग्न और मेष राशि के हुए। इस लग्न में चन्द्रमा चतुर्थ भाव के स्वामी हुए , अतः चन्द्रमा सुखेश हैं , स्व उपार्जित संपत्ति , माता के कारक , भूमि भवन वाहन इन सुखों के कारक हुए चन्द्रमा इस कुंडली में। अतः चन्द्रमा लग्न में हैं तो जातक इन सभी चीज़ों को पाने की इक्षा रखता होगा , इन्हे पाने के लिए प्रयत्नशील रहेगा और अपने परिश्रम के दम पे इन्हे पाएगा भी। हालाँकि मेष लग्न के जातक ऊर्जावान होते हैं और इस वजह से इन्हें क्रोध भी अधिक अति है। चन्द्रमा मंगल मित्र हैं और एक अग्नि तत्व और एक जल तत्व के स्वामी हैं अतः आपको ज़िद्दी , चिड़चिड़ , धैर्य की कमी , और किसी भी निर्णय को तुरंत करके पछताने वाले होंगे आप।

चन्द्रमा का दूसरे भाव में जाकर बैठना अत्यंत श्रेष्ठ परिणाम देखने को मिलेगा , चन्द्रमा उच्च की राशि में हो कर धन भाव में पैतृक संपत्ति से सुख दिलाने वाला होता है , और उन्ही संपत्ति को लेकर आगे बढ़ता है तथा अपने संपत्ति में वृद्धि करता है। द्वितीय भाव में बैठे चन्द्रमा की दृष्टि अष्टम भाव पे होगी अतः गले से जुड़ी समस्या देंगे , ठंढे से परेशानी या शीत जनित रोग हो जाती है। रत्न मोती पहनने के बजाय भगवान शिव की आराधना से चन्द्रमा का उपचार बेहतर होगा। अपने माता की नित्य सेवा कीजिये , पानी की बर्बादी काम कीजिये , इससे चन्द्रमा ठीक हो जाएंगे।

तीसरे भाव में बैठे चन्द्रमा सुखेश का पराक्रम भाव में जाकर बैठना अपने राशि से द्वि-द्वादस का सम्बन्ध बनेगा ,बुध के राशि में बैठे चन्द्रमा मेष लग्न वालों के शुभ नहीं हैं क्योंकि बुध मेष लग्न की कुंडली में सबसे अकारक ग्रह हैं। अगर बुध कुंडली में चन्द्रमा से तीन घर आगे या पीछे स्थित नहीं होंगे तो ये आपको नुकसान पहुचाएंगे। छोटे भाई बहनों से ख़राब व्यवहार ,मन का अशांत रहना , गलत निर्णय लेना , जिस भाई के लिए आप मदद करेंगे वही आपको पलट कर धोखा दे देगा। अगर चन्द्रमा पर राहु , शनि की दृष्टि या युति हुई तो भाग्य में कमी होगी , मन का अशांत रहना , किसी भी कार्य को टिक कर नहीं कर पाएंगे। हमेशा अपने मन की न करें अपने से बड़े बुजुर्गों की सलाह लें। यहाँ आप किसी बहुत अनुभवी ज्योतिष की सलाह लेकर रत्न व मंत्रों से उपचार करवाएं।

कुंडली के चतुर्थ भाव में चन्द्रमा अपने ही राशि में दिग्बली हो जाएंगे और यहाँ आपको श्रेष्ठ परिणाम देखने को मिलेगा , माता से बहुत अच्छे सम्बन्ध \ पिता से अच्छे सम्बन्ध बनाए रखेगा। अपने माता का कहना मानिये , उनकी हर प्रकार से सेवा कीजिये , ऐसा करना आपको बहुत अच्छा परिणाम देगा। आप मेष लग्न और कर्क राशि के हुए , ऐसे में आपके मन मस्तिष्क में द्वन्द चलता रहेगा। आप हर चीजों को प्राप्त करने की इच्छा रखते हैं लेकिन आपका आलसी स्वभाव आपको मेहनत नहीं करने देगा। यही आपके सफलता में बाधा बनेगा , ऐसे में आपको चन्द्रमा का रत्न धारण करना बहुत उचित होगा। शिव जी की आराधना , मंगल देव की आराधना से आपके सारे कष्टों का निवारण होगा। पानी की बर्बादी न करें , माता का सम्मान करें। इससे चन्द्रमा बहुत अच्छा परिणाम देंगे।

पंचम भाव में चन्द्रमा केंद्र-त्रिकोण राज योग का निर्माण करेंगे , आप मेष लग्न और सिंह राशि के हुए। भव्य व्यक्तित्व के प्रतिनिधि हुए आप , क्रोध बहुत अधिक होगी आप में लेकिन अनुशासन भी उतना ही होगा। हर कार्य को आप सोच विचार कर करने वाले , हर तथ्य को देख सुन कर करने वाले होंगे आप। मन स्थिर व एकांत आपको प्रिय होगा , क्रोध इतना अधिक की कोई उसे बर्दाश्त न कर सके लेकिन अनुचित बातों पे आपका क्रोध नहीं होता। पेट भरे होने पर सिंह राशि होने की वजह से कई बार आप आलस्य कर जाते हैं। यदि आप सिंह राशि के हैं और सूर्य पराक्रमेश और कर्मेश यानि की 3 और 10 वें घर के स्वामी के साथ युति कर लेते हैं तो आलसी के जगह आप कर्मठ माने जाएंगे।

छठे भाव में चन्द्रमा को छठे भाव का दोष नहीं लगेगा लेकिन बुध की राशि में होने पर , बुध तीन घर आगे या पीछे होने पर मित्रवत होने पर परिणाम अच्छा मिलेगा विपरीत राजयोग का लाभ मिलेगा। अगर चन्द्रमा और बुध तात्कालिक मित्रता में नहीं हुए तो शीत जनीत रोग , माता को कष्ट , माता का सुख ना मिल पाना ये देखा जाएगा। गुरु से छठे स्थान पे होने पर सकट योग बन जाएगा ऐसे में मानसिक रोग एवं अशांति होगी। अतः गुरु से युति होना दृष्ट होना या तीन घर गुरु ,चन्द्रमा से आगे पीछे कहीं भी हो ये आपके लिए अच्छा साबित होगा। अतः आपको गुरु मानसिक व मन की परेशानियों से बचाएंगे। जल बर्बाद न करें , माता का सम्मान करें , ऐसा करने से आपके सुखों में वृद्धि होगी। पूर्णिमा का व्रत एवं भोलेनाथ की उपासना से आपको अत्यंत लाभ होगा। अतः आप मोती न पहने। पाप ग्रह से युति हो तो भी।

सप्तम भाव में चन्द्रमा का होना आपको मेष लग्न तथा तुला राशि का बनाता है , सर्व प्रथम चन्द्रमा शुक्र की राशि में बैठे हैं अतः शुक्र की तात्कालिक मित्रता देख लीजिये चन्द्रमा के साथ ,अगर आपके कुंडली में शुक्र चन्द्रमा से तीन घर आगे या तीन घर पीछे कही बैठे हैं तो यह शुभ स्तिथि में है। अगर ऐसा नहीं है तो आपको मानसिक अशांति का सामना करना होगा , लग्न पे ऐसे चन्द्रमा की दृष्टि आपको समाज में अपमान दिलाएगी , लोग आपकी बातों का यकीन नहीं किया करेंगे। पति या पत्नी आपके स्वभाव के बिलकुल विपरीत होंगे , आप अपने मकसद को पूरा करने की जी तोड़ कोशिश करते हुए पाए जाएंगे वही आपके पति \ पत्नी बिलकुल लापरवाह किस्म के होंगे। अगर चन्द्रमा ज़्यादा पीड़ित हुए तो दिक्कत ज़्यादा होगी। रत्न धारण के बजाय आप शिव जी की आराधना जीवन भर करते रहिये। जल बर्बाद न करें , माता का सम्मान करें। देव गुरु बृहस्पति अगर चन्द्रमा पे दृष्टि या युति सम्बन्ध रखते हैं तो आपको गुरु की उपासना व कुंडली के अनुसार उनका रत्न धारण करना भी बहुत शुभ फलदायी योग।

अष्टम भाव में चन्द्रमा 0 से 6 डिग्री तक मृत तथा नीच राशि में होंगे अतः आपको शीत जनित रोग दे देंगे , लेकिन चन्द्रमा को 6,8 और 12 भाव का दोष नहीं लगेगा। आप मेष लग्न और वृश्चिक राशि के हुए। सुखेश चन्द्रमा अपने घर से नवम पंचम राजयोग का निर्माण करेंगे , स्वास्थ्य में कमी रहेगी लेकिन , अष्टम भाव से दूसरे भाव को देखने पर बहुत शुभ परिणाम मिलेगा , आपको बरी मात्रा में अचल संपत्ति , पूर्वजों की ज़मीन दिलाएंगे। अगर चन्द्रमा पे पाप ग्रहों की दृष्टि परती हो तो मंगल को बल दीजिये। अगर गुरु शुक्र ग्रहों की दृष्टि परती है तो बहुत शुभ फलदायी होगा। मोती पहनने से बचिए ,और प्रभु शिव की आराधना कीजिये इससे आपको खूब लाभ होगा।

नवम भाव में चन्द्रमा सुखेश होकर भाग्य भाव में जाना अत्यंत शुभ स्तिथि है , षडाष्टक योग का निर्माण हो रहा लेकिन इसका असर नहीं होगा क्यूंकि चन्द्रमा केंद्र त्रिकोण राजयोग का भी निर्माण कर रहे हैं जो षडाष्टक के परिणामों को धूमिल कर देंगे। आप मेष लग्न और धनु राशि के हुए , अतः आप जिद्दी और गुस्सैल स्वभाव के होंगे। आप दिल के भले और लोगो के मुँह पे सत्य बोलने से नहीं चूकेंगे। भाग्य आपका साथ देगा अपने जीवन काल में भूमि ,भवन , वहां की प्राप्ति होगी ही। अच्छे कर्म के साथ साथ अपने माता पिता का सम्मान कीजिये। माता के अपमान करने पर अपने सुखों की हानि कर रहे होंगे आप। अगर चाहें तो किसी ज्योतिष से पूछ कर मोती धारण कर सकते हैं।

कुंडली के दशम भाव में चन्द्रमा आपको मेष लग्न तथा मकर राशि का बनाता है। चन्द्रमा अपने एक मात्र दृष्टि से अपने भाव को देखेंगे अतः आपको माता का सुख , माता आपकी भव्य व्यक्तित्व की तथा आप भूमि ,भवन , वाहन से युक्त होंगे या इनके दशा अन्तर्दशा में आपको प्राप्त होगी। मंगल से युति सम्बन्ध हुई तो आपको बहुत सफलता देने वाला आपको धनि बनाने वाला होगा। पिता की तरक्की व आप अपने छोटे भाई बहनो से प्रेम करने वाले होंगे। वही अगर शनि से युति हो तो विष योग का निर्माण हुआ जिससे आपके रहस्यमय व्यक्तित्व में और भी वृद्धि कर देंगे चन्द्रमा से सम्बंधित , liquid से सम्बंधित व्यापार करके आप धन कमा सकते हैं। दूध का व्यापार , कृषि कार्य से आपको लाभ प्राप्त होगा। चन्द्रमा से पीछे कोई पाप ग्रह से न घिरा हो तो यह आपके लिए अच्छा साबित होगा

ग्यारहवे स्थान में चन्द्रमा , अपने भाव से 6 – 8\ षडाष्टक योग का निर्माण कर रहे है , अगर चन्द्रमा पे पाप ग्रह से युति या दृष्टि सम्बन्ध न हो तो आपने ये महसूस किया होगा की आपके पास एक जैसा धन कभी नहीं आता है। आप मेष लग्न तथा कुम्भ राशि के हुए। अपने लाभ व आय में वृद्धि के लिए शिव जी की उपासना कीजिये , पूर्णिमा का व्रत कीजिये , इससे आपके चन्द्रमा शुभ फल दायी फलदायी होंगे। प्रत्येक सोमवार शिवलिंग की दूध से अभिषेक कीजिये जिससे आपको श्रेष्ठ लाभ प्राप्त हो सके और ये आप जितने लम्बे समय तक कर सकते हैं कीजिये। शनि , राहु से सम्बन्ध अच्छे होने पे आय अच्छी होती रहेगी।

बारहवे भाव में चन्द्रमा मीन राशि में जोकि जल तत्व की राशि है अतः आप मेष लग्न तथा मीन राशि के हुए। आपका मन चंचल होगा , आलस्य भी देंगे ,आपके मन में तरह तरह के खयाल आते रहेंगे। यहाँ बैठे चन्द्रमा आपके स्वास्थ्य में उतर चढ़ाव लाते रहेंगे। सुखेश का व्यय भाव में जाना आपके लिए आध्यात्म का मार्ग खोलेगा। अपने माता की सेवा ,गौ सेवा में ही आपके तरक्की के मार्ग हैं। गुरु से तात्कालिक मैत्री यानि की तीन घर आगे पीछे गुरु नहीं हुए तो आप अपने धन का गलत कार्यों में इस्तेमाल करेंगे। अतः कोशिश कीजिये की आपका धन सही कार्यो पे खर्च हो। अपने माता के हाथों से दान पुण्य कराइये इससे चन्द्रमा बुलंद होंगे और सभी सुखों को देने वाले होंगे , और परमपिता परमेश्वर महादेव की आराधन से आपको हर प्रकार से लाभ होगा।

मेष लग्न में सूर्य का बारह भावों में फल योग।

2 thoughts on “मेष लग्न वालों के लिए प्रत्येक ग्रहों का फलादेश। 2।Result of each planet for the aries ascendent । 2 ।

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